रांची
अगस्त क्रांति दिवस और विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर कांग्रेस भवन, रांची में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने की। कार्यक्रम की शुरुआत में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अगस्त क्रांति दिवस की भूमिका पर चर्चा की गई। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही, आदिवासी समुदाय को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं दी गईं।
केशव महतो कमलेश ने कहा कि "करो या मरो" का नारा आज ही के दिन महात्मा गांधी ने दिया था, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को एक निर्णायक मोड़ दिया। इस आंदोलन ने पूरे देश में नई ऊर्जा और उत्साह भर दिया था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता की वेदी पर कई महान विभूतियों ने अपने प्राणों की आहुति दी, और आज का दिन उनके बलिदान को याद करने का दिन है।

विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज आज अपने हक, अधिकार, अस्मिता और संस्कृति को बचाने के लिए जागरूकता से लड़ाई लड़ रहा है, जो सराहनीय है। यह समाज प्रकृति और मानव के बीच की अहम कड़ी है, जिसने सदियों पहले जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संकल्प लिया और आज भी निभा रहा है। इसी भूमिका को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 1994 में इस दिवस की घोषणा की थी।
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन स्वतंत्रता की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ। इसमें हर वर्ग—जाति, धर्म, युवा, बुजुर्ग, महिलाएं—सबने मिलकर हिस्सा लिया और आंदोलन को गति दी, जिसके परिणामस्वरूप अंग्रेजी हुकूमत को झुकना पड़ा और देश को आज़ादी मिली।
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उन्होंने आदिवासी समाज को बधाई देते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर झारखंड राज्य के निर्माण तक आदिवासी समुदाय की भूमिका ऐतिहासिक रही है। बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो जैसे वीरों ने आज़ादी की लड़ाई में बलिदान दिया, वहीं बाद में कई नायकों ने झारखंड आंदोलन को भी सफलता तक पहुंचाया। आज यह समाज संगठित है और कई नेतृत्वकर्ता इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अनादी ब्रह्म, राकेश सिन्हा, विनय सिन्हा दीपू, सोनाल शांति, अभिलाष साहू, गजेंद्र सिंह, जगदीश साहू, राजन वर्मा, राज वर्मा, अइनुल हक अंसारी, चंद्र रश्मि पिंगुआ, के. गिरी, सलीम खान, संजय कुमार, खालिद सैफुल्लाह, रजी अहमद, शाहिद सहित अनेक लोग मौजूद थे।
